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Stop Accidents-दुर्घटनाओं को रोकिए

कई बार छोटी दुर्घटनाएं होकर कोई बडी बला टल जाती है, तो कभी छोटी दुर्घटना भी जानलेवा साबित हो जाती है। यहां हम कुछ ऎसे सरल किन्तु अत्यन्त अपयोगी उपाय बता रहे हैं जिनका प्रयोग करने से दुर्घटना के योग को टाला जा सकता है अथवा घातक परिणामों से मुक्ति मिल सकती है।

पहला- यह एक ऎसा सरल उपाय है जिसके प्रयोग आप सुनिश्चित लाभ की अपेक्षा कर सकते हैं। इस प्रयोग के अन्तर्गत गुरूपुष्य नक्षत्र में शुभ मुहूर्त में निकाली गई अपामार्ग नामक पौधे की जड ले लें। इस पौधे को लटजीरा, आंधाझाडा इत्यादि नामों से भी पुकारा जाता है। इस जड को एक फिटकरी के टुकडे एवं एक कोयले के टुकडे के साथ एक काले वस्त्र में बांधकर उससे वाहन के चारों ओर दाहिने घूमते हुये 7 चक्कर लगायें। यह एक प्रकार का उसारा करने के समान है। इसके पश्चात इस पोटली को वाहन मे कहीं रख दें। ऎसा करने से वाहन दुरात्माओं से रक्षित रहता है तथा उसकी दुर्घटनाओं से भी रक्षा होती है।

दूसरा- यह एक यंत्र प्रयोग है। इस यंत्र निर्माण के पश्चात इसे सिद्ध करके अपने वाहन में अथवा अपने पास रखा जाए तो दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। अगर आपका वाहन चार पहिया है तो इसे डेशबोर्ड पर रखने की व्यवस्था करें। अगर दोपहिया वाहन है तो अपने पर्स में रखें। इस यंत्र का प्रारूप आगे दिया गया है। चूंकि किसी भी दुर्घटना से रक्षा करने वाले मारूति नन्दन श्री हनुमानजी हैं, अत: इस यंत्र का लेखन मंगलवार अथवा शनिवार को करें। अगर शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार अथवा शनिवार को करें तो अधिक प्रभावी रहेगा। इसके लिये आपको केशर को पानी में घोलकर स्याही का निर्माण करना पडेगा। लिखने के लिये अनार की कलम की व्यवस्था करें। एक भोजपत्र की भी व्यवस्था करके रखें। जिस दिन आपको यंत्र का निर्माण करना है, उस दिन स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। आवास में ही किसी एकान्त स्थान का चयन करें। दक्षिण को छोडकर किसी भी दिशा की तरफ मुंह करके बैठें। बैठने के लिये सूती अथवा ऊनी आसन का प्रयोग किया जा सकता है। एक बाजोट बिछायें। इसके ऊपर सवा मीटर लाल वस्त्र चार तह करके बिछायें। इसके ऊपर हनुमानजी की तस्वीर को स्थान दें। इसके समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। अब आप यंत्र का प्रारूप बनायें। यंत्र निर्माण के समय हनुमानजी के मंत्र का जाप करते रहें। यंत्र लेखन के पश्चात इसे बाजोट पर हनुमानजी की तस्वीर के समक्ष रख दें। अब आपको हनुमानजी के किसी भी मंत्र की एक माला का जाप करना है। जाप के पश्चात हाथ जोडकर उठ जायें। जब तक दीपक जलता है, तब तक यंत्र को वहीं रखा रहने दें। दीपक ठण्डा हो जाये, इसके बाद यंत्र को उठा लें। तस्वीर को पूजास्थल में स्थान दें। बाजोट एवं आसन आदि भी समेट लें। अब आप किसी भी प्रकार से यंत्र को कार के डेशबोर्ड पर रखें। अगर दोपहिया वाहन है तो जेब में रखें। यह यंत्र आपके लिये रक्षा कवच का काम करेगा और आपको किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा कर रखेगा।

तीसरा- इस प्रयोग को सम्पन्न करने वाला स्नान आदि से निवृत होकर, किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर जाकर उन्हें फूल-प्रसाद आदि अर्पण करें। तदुपरान्त उसी मंदिर में बैठकर हनुमानजी को श्रीराम श्रीराम नाम सुनायें। वह चाहे तो श्रीराम नाम की ग्यारह माला का जाप करें। इसके पश्चात अपने दाहिने हाथ से हनुमानजी के बायें पैर का सिंदूर ले ले। ध्यान रहे कि सिंदूर लेने हेतु अनामिका का प्रयोग करें। इस सिंदूर को एक कागज के मध्य में टीके की भांति लगा लें। उस कागज पर लगाये गये टीके के ऊपर की ओर श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्दे लिखें तथा टीके के नीचे की ओर भी श्रीराम दूतमं शरणम् प्रपद्दे लिखें। टीके के दोनों बाजुओं की तरफ अर्थात दायें-बायें श्रीराम दूताय नम: ऎसा लिखें। हनुमानजी के नाम से जडित इस यंत्र को वाहन में ड्राइवर के समक्ष ऊपर की ओर लगा दें। गाडी चालाने के पूर्व ड्राईवर इस यंत्र को अगरबत्ती लगाकर प्रणाम कर वाहन चलाना प्रारम्भ करे। ऎसा करने से वाहन श्रीहनुमानजी की कृपा से सुरक्षित रहता है। इस यंत्र को स्थापित करने वाला ड्राईवर गलत कार्यो से बचें अन्यथा लाभ की जगह हानि भी हो सकती है।

चौथा- वाहन को दुर्घटना से बचाने हेतु अनेक सरल प्रयोग सुझाए गए हैं। यह प्रयोग अत्यन्त ही सरल एवं प्रभावी है। इस प्रयोग के अन्तर्गत वाहन चालक व्यक्ति एक काले वस्त्र का चौकोर टुकडा लें। उसमें लगभग देा सौ ग्राम फिटकरी का एक टुकडा बांध दें। इस पोटली को वाहन के सामने की ओर किसी मजबूत डोरी से लटका दें। इसके प्रभाव से वाहन किसी भी दुर्घटना से रक्षित रहता है। एक अन्य प्रयोग में वाहन के सामने और पीछे की ओर किसी राक्षस का मुखौटा बनाने या लगाने से भी वाहन दुर्घटना से मुक्त रहता है। कुछ लोग वाहनों को दुर्घटना एवं बुरी नजर से बचाने के लिये उनके सामने की ओर जूता लटकाये रखते हैं। इसी प्रकार वाहन के सामने की ओर त्रिकोणाकार आकृति में काटे गये दो काले वस्त्रों को कोणीय रूप से लगाने से भी वाहन नकारत्मक ऊर्जा से दूर रहता है। भगवान शिव को विध्वंस का देव माना गया है किन्तु इन्हीं की कृपा से साक्षात मृत्यु की ओर जाता हुआ व्यक्ति भी पुन: जीवनदान पा जाता है, इसलिये जितने भी भारी चार पहिया वाहन के चालक हैं, उनमें से अधिकांश अपने डेशबोर्ड पर भगवान शिव की प्रतिमा अथवा तस्वीर लगाते हैं। इन चालकों का विश्वास होता है कि जो मारने वाला है वही बचाने वाला भी होता है। अनेक चालक अपने डेश बोर्ड पर हनुमानजी की तस्वीर अथवा प्रतिमा को स्थान देते हैं। इनमें से किसी को अथवा जिन्हें आप मानते हैं, उनकी छोटी प्रतिमा अथवा तस्वीर को अवश्य स्थान दें। जब वाहन चलायें तो मानसिक रूप से इनका स्मरण अवश्य करें। दोपहिया वाहन चालक सिद्ध दुर्घटनाशक मारूति यंत्र अपनी शर्ट की जेब में रखें। इससे किसी भी दुर्घटना से रक्षा होगी।

How to Prevent Accidents-दुर्घटनाओं को रोकने के लिए उपाय

आप बार-बार दुर्घटनाग्रस्त होते हैं?

दुर्घटना का जिक्र आते ही जिन ग्रहों का सबसे पहले विचार करना चाहिए वे हैं शनि, राहु और मंगल यदि जन्मकुंडली में इनकी स्थिति अशुभ है (6, 8, 12 में) या ये नीच के हों या अशुभ नवांश में हों तो दुर्घटनाओं का सामना होना आम बात है।
 
शनि : शनि का प्रभाव प्राय: नसों व हड्‍डियों पर रहता है। शनि की खराब स्थिति में नसों में ऑक्सीजन की कमी व ‍हड्‍डियों में कैल्शियम की कमी होती जाती है अत: वाहन-मशीनरी से चोट लगना व चोट लगने पर हड्‍डियों में फ्रैक्चर होना आम बात है। यदि पैरों में बार-बार चोट लगे व हड्‍डी टूटे तो यह शनि की खराब स्थिति को दर्शाता है।

क्या करें : शनि की शांति के उपाय करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। मद्यपान और माँसाहार से पूर्ण परहेज करें। नौकरों-कर्मचारियों से अच्छा व्यवहार करें। शनि न्याय का ग्रह है इसलिए न्याय का रास्ता अपनाएँ, परिवार से विशेषत: स्त्रियों से संबंध मधुर रखें।

राहु : राहु का प्रभाव दिमाग व आँखों पर रहता है। कमर से ऊपरी हिस्से पर ग्रह विशेष प्रभाव रखता है। राहु की प्रतिकूल स्थिति जीवन में आकस्मिकता लाती है। दुर्घटनाएँ, चोट-चपेट अचानक लगती है और इससे मनोविकार, अंधापन, लकवा आदि लगना राहु के लक्षण हैं। पानी, भूत-बाधा, टोना-टोटका आदि राहु के क्षेत्र में हैं।

क्या करें : गणेश जी व सरस्वती की आराधना करें। अवसाद से दूर रहें। सामाजिक संबंध बढ़ाएँ। रिस्क न लें। खुश रहें व बातें न छुपाएँ।

मंगल : मंगल हमारे शरीर में रक्त का प्रतिनिधि है। मंगल की अशुभ स्थिति से बार-बार सिर में चोट लगती है। खेलते-दौड़ते समय गिरना आम बात है और इस‍ स्थि‍ति में छोटी से छोटी चोट से भी रक्त स्राव होता जाता है। रक्त संबंधी बीमारियाँ, मासिक धर्म में अत्यधिक रक्त स्राव भी खराब मंगल के लक्षण हैं। अस्त्र-शस्त्रों से दुर्घटना होना, आक्रमण का शिकार होना इससे होता है।

क्या करें : मंगलवार का व्रत करें, मसूर की दाल का दान करें। उग्रता पर नियंत्रण रखें। मित्रों की संख्‍या बढ़ाएँ। मद्यपान व माँसाहार से परहेज करें। अपनी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा दें।
 
कब-कब होगी परेशानी : जब-जब इन ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा आएगी, तब-तब संबंधित दुर्घटनाओं के योग बनते हैं। इसके अलावा गोचर में इन ग्रहों के अशुभ स्थानों पर जाने पर, स्थान बदलते समय भी ऐसे कुयोग बनते हैं अत: इस समय का ध्यान रखकर संबंधित उपाय करना नितांत आवश्यक है।

Effect of Mars-मंगल दोष

मंगल दोष और होने वाली परेशानियॉं
 
ये भ्रम लोगो को की मंगली होने का मतलब मंगल दोष होता है।

मंगल दोष 28 वे वर्ष में अपने आप समाप्त हो जाता है और बिना कुंडली मिलाये शादी करा देनी चाहिए ये गलत धारणा है। मंगल दोष वाले माता पिता की संतान का 5 वर्ष की आयु तक बेहद खास ध्यान रखने की जरूरत होती है क्योकि उसका प्रतिरक्षित सिस्टम काफी कमजोर होगा इस बात की बहुत संभावना होती है।

The Power of Beej Mantra-बीज मंत्र की महिमा

ॐ कार मंत्र जैसे दूसरे २० मंत्र और हैं | उनको बोलते हैं बीज मंत्र | उसका अर्थ खोजो तो समझ में नही आएगा लेकिन अंदर की शक्तियों को विकसित कर देते हैं | सब बिज मंत्रो का अपना-अपना प्रभाव होता है | जैसे ॐ कार बीज मंत्र है ऐसे २० दूसरे भी हैं |

ॐ बं ये शिवजी की पूजा में बीज मंत्र लगता है | ये बं बं.... अर्थ को जो तुम बं बं.....जो शिवजी की पूजा में करते हैं | लेकिन बं.... उच्चारण करने से वायु प्रकोप दूर हो जाता है | गठिया ठीक हो जाता है | शिव रात्रि के दिन सवा लाख जप करो बं..... शब्द, गैस ट्रबल कैसी भी हो भाग जाती है | बीज मंत्र है खं.... हार्ट-टैक कभी नही होता है | हाई बी.पी., लो बी.पी. कभी नही होता | ५० माला जप करें, तो लीवर ठीक हो जाता है | १०० माला जप करें तो शनि देवता के ग्रह का प्रभाव चला जाता है | खं शब्द |

ऐसे ही ब्रह्म परमात्मा का कं शब्द है | ब्रह्म वाचक | तो ब्रह्म परमात्मा के ३ विशेष मंत्र हैं |
 ॐ, खं और कं |
 
ऐसे ही रामजी के आगे भी एक बीज मंत्र लग जाता है | रीं रामाय नम: ||
कृष्ण जी के मंत्र के आगे बीज मंत्र लग जाता है | क्लीं कृष्णाय नम: ||

तो जैसे एक-एक के आगे, एक-एक के साथ मिंडी लगा दो तो १० गुना हो गया | ऐसे ही आरोग्य में भी ॐ हुं विष्णवे नम: | तो हुं बिज मंत्र है | ॐ बिज मंत्र है | विष्णवे..., तो विष्णु भगवान का सुमिरन | ये आरोग्य के मंत्र हैं | तो बिज मंत्र जिसमें जितने |

एक मैं मंत्र देता हूँ, जो एकदम सीरियस है, केस ठीक नही है, डॉक्टरों को समझ में नही आ रहा, तबियत ठीक नही है, फलाना है, धिन्गना है, एकदम विशेष जो रोगग्रस्त अथवा समस्या से, तकलीफ से ग्रस्त है | उनको मैं मंत्र देता हूँ | उसको मैंने ऐसे ही विनोद में नाम रख दिया यमराज का मोबाईल नम्बर है, तो उसमें ४ बिज मंत्र हैं |
तो बीज मंत्रो की साधना अथवा बीज मंत्रो का प्रभाव उसी सच्चिदानंद परमात्मा से आता है |

ये जो देवता लोग आशीर्वाद देते हैं अथवा जिनका आशीर्वाद पड़ता है, उनके जीवन में बीज मंत्रो का भी प्रभाव पड़ता है |

मंत्र शास्त्र में बीज मंत्रों का विशेष स्थान है। मंत्रों में भी इन्हें शिरोमणि माना जाता है क्योंकि जिस प्रकार बीज से पौधों और वृक्षों की उत्पत्ति होती है, उसी प्रकार बीज मंत्रों के जप से भक्तों को दैवीय ऊर्जा मिलती है। ऐसा नहीं है कि हर देवी-देवता के लिए एक ही बीज मंत्र का उल्लेख शास्त्रों में किया गया है। बल्कि अलग-अलग देवी-देवता के लिए अलग बीज मंत्र हैं।

“ऐं” सरस्वती बीज । यह मां सरस्वती का बीज मंत्र है, इसे वाग् बीज भी कहते हैं। जब बौद्धिक कार्यों में सफलता की कामना हो, तो यह मंत्र उपयोगी होता है। जब विद्या, ज्ञान व वाक् सिद्धि की कामना हो, तो श्वेत आसान पर पूर्वाभिमुख बैठकर स्फटिक की माला से नित्य इस बीज मंत्र का एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है।

“ह्रीं” भुवनेश्वरी बीज । यह मां भुवनेश्वरी का बीज मंत्र है। इसे माया बीज कहते हैं। जब शक्ति, सुरक्षा, पराक्रम, लक्ष्मी व देवी कृपा की प्राप्ति हो, तो लाल रंग के आसन पर पूर्वाभिमुख बैठकर रक्त चंदन या रुद्राक्ष की माला से नित्य एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है।

“क्लीं” काम बीज । यह कामदेव, कृष्ण व काली इन तीनों का बीज मंत्र है। जब सर्व कार्य सिद्धि व सौंदर्य प्राप्ति की कामना हो, तो लाल रंग के आसन पर पूर्वाभिमुख बैठकर रुद्राक्ष की माला से नित्य एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है।

“श्रीं” लक्ष्मी बीज । यह मां लक्ष्मी का बीज मंत्र है। जब धन, संपत्ति, सुख, समृद्धि व ऐश्वर्य की कामना हो, तो लाल रंग के आसन पर पश्चिम मुख होकर कमलगट्टे की माला से नित्य एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है।

"ह्रौं" शिव बीज । यह भगवान शिव का बीज मंत्र है। अकाल मृत्यु से रक्षा, रोग नाश, चहुमुखी विकास व मोक्ष की कामना के लिए श्वेत आसन पर उत्तराभिमुख बैठकर रुद्राक्ष की माला से नित्य एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है।

"गं" गणेश बीज । यह गणपति का बीज मंत्र है। विघ्नों को दूर करने तथा धन-संपदा की प्राप्ति के लिए पीले रंग के आसन पर उत्तराभिमुख बैठकर रुद्राक्ष की माला से नित्य एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है।

"श्रौं" नृसिंह बीज । यह भगवान नृसिंह का बीज मंत्र है। शत्रु शमन, सर्व रक्षा बल, पराक्रम व आत्मविश्वास की वृद्धि के लिए लाल रंग के आसन पर दक्षिणाभिमुख बैठकर रक्त चंदन या मूंगे की माला से नित्य एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है।

“क्रीं” काली बीज । यह काली का बीज मंत्र है। शत्रु शमन, पराक्रम, सुरक्षा, स्वास्थ्य लाभ आदि कामनाओं की पूर्ति के लिए लाल रंग के आसन पर उत्तराभिमुख बैठकर रुद्राक्ष की माला से नित्य एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है।

“दं” विष्णु बीज । यह भगवान विष्णु का बीज मंत्र है। धन, संपत्ति, सुरक्षा, दांपत्य सुख, मोक्ष व विजय की कामना हेतु पीले रंग के आसन पर पूर्वाभिमुख बैठकर तुलसी की माला से नित्य एक हजार बार जप करने से लाभ मिलता है।

Measures nine planets-नौ ग्रहो के उपाय

सूर्य: यदि आपकी जन्म पत्रिका में सूर्य अच्छे फल नही दे रहा है, तो नवरात्र में आपको महात्रिपुरसुंछरी और कूष्माण्डा देवी की उपासना करनी होगी और मन्त्र ‘ऐं क्लीं सौः’ का जप नवरात्र में करना आपको लाभ दायक होगा। बालत्रिपुरसुन्दी तथा कूष्माण्डा देवी का विग्रह, चित्र अथवा यन्त्र रखकर उनका नित्य पूजन करें ने कृष्टो मे कमी आयेगी, मन्त्र की नित्य 9 माला करे।

चन्द्रमा: जन्मपत्रिका में यदि चन्द्रमा अच्छे फल नही दे रहा है, तो व्यक्ति को माँ लक्ष्मी और शैलपुत्री की पूजा-उपासना करनी चाहिए। इन नवरात्र में प्रथम दिन से ही दोनों देवियों के चित्र, के सामने अथवा यन्त्र को सामने रखकर सर्वप्रथम उनकी पूजा-उपासना करें। तत्पष्चात् ‘ऊँ नमः कमलवासिन्यै स्वाहा’ मन्त्र का नवरात्रपर्यन्त नित्य 9 मालाओं का जप करें।

मंगल: यदि आपकी जन्मपत्रिका में मंगल अच्छे फल नही दे रहा है, तो इन नवरात्र में स्कन्दमाता और मातंगी देवी की पूजा-उपासना करनी चाहिए। प्रथम नवरात्र से ही दोनों देवियों के विग्रह, चित्र अथवा यन्त्र को स्थापित करके उनकी पूजा-उपासना करनी चाहिए। तत्पष्चात ‘ऊँ हीं क्लीं हं मातंग्यै फट् स्वाहा’ मन्त्र की नवरात्रपर्यन्त 9 मालाओं का जप करें।

बुध: यदि जन्मपत्रिका में बुध अच्छे फल नही दे रहा है, और समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो, तो इस नवरात्र में महातारा और ब्रह्मचारिणी देवी के विग्रह, चित्र अथवा यन्त्र को स्थापित कर नवरात्रपर्यन्त नित्य उनका पूजन अर्चन करें और ‘ऊँ हीं त्रीं हुं फट्’ मन्त्र का नवरात्रपर्यन्त नित्य 9 मालाओं का जप करें।

गुरू: यदि आपकी जन्मपत्रिका में गुरू अशुभफलकारी हो, अच्छे फल नही दे रहा है तो उसे अनुकूल बनाने के लिए नवरात्र में नित्य माँ बगलामुखी और माँ चन्द्रघण्टा के चित्र अथवा यन्त्र का पूजन करें। मन्त्र की नित्य 9 मालाओं का नवरात्र पर्यन्त जप करें।

शुक्र: यदि आपकी जन्मपत्रिका में शुक्र अशुभफलकारी हो, अच्छे फल नही दे रहा है तो उसे अनुकूल बनाने के लिए इन नवरात्रों में माँ भुवनेष्वरी और महागौरी के चित्र अथवा यन्त्र की स्थापना कर नित्य उनका पूजन-अर्चन करें और नित्य 9 मालाओं का जप करें।

शनि: यदि आपकी जन्मपत्रिका में शनि अशुभफलकारी हो, अच्छे फल नही दे रहा है तो नवरात्र में महाकाली और कालरात्रि की उपासना करना श्रेष्ठ होगा। इस हेतु इनके विग्रह, चित्र अथवा यन्त्र का नवरात्र पर्यन्त नित्य पूजन-अर्चन करें और ‘ऊँ हृौ काली महाकाली किलिकिले फट् स्वाहा’ मन्त्र की नित्य 9 मालाओं का जप करें।

राहू: यदि आपकी जन्मपत्रिका अशुभफलकारी हो, अच्छे फल नही दे रहा है और आपको पीड़ित कर रहा हो, तो उसे अनुकूल बनाने के लिए माँ छिन्नमस्ता और माँ कात्यायिनी की नित्य पूजा-उपासना करली चाहिए। इस हेतु नवरात्र में प्रथम दिन से ही पूजा स्थान में उनके विग्रह, चित्र अथवा यन्त्र की स्थापना कर नित्य उनका पूजन करें। मन्त्र की 9 मालाओं का जप नवरात्र पर्यन्त करें।

केतु: जन्मपत्रिका में केतु अशुभफलकारी हो, अच्छे फल नही दे रहा है और उसे अनुकूल बनाने के लिए नवरात्र में त्रिपुर भैरवी और सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना उनके विग्रह, चित्र अथवा यन्त्र की स्थापना कर नवरात्र पर्यन्त नित्य करनी चाहिए। साथ ही ‘हसैं हसकरीं हसैं’ मन्त्र का नवरात्र पर्यन्त नित्य 9 मालाओं का जप करना चाहिए।

Way to speak to the soul-आत्मा से बात करने का तरीका

आप भी कर सकते मृत आत्माओ से बात

ये है इलेक्ट्रॉनिक वॉयस प्रोजेक्शन यानि ईवीपी. इसी मशीन में मृतकों की आवाजें रिकार्ड की जाती रही हैं.

क्या मृत लोग आपस में बात करते हैं? क्या कोई जीवित इंसान किसी मृत शख्स से संवाद स्थापित कर सकता है? क्या आप मुर्दों की गपशप सुन सकते हैं?

8 Things you do on Tuesday can boost your Destiny-मंगलवार को करें ये 8 काम

हनुमानजी चमका देंगे भाग्य

तंत्र शास्त्र के अनुसार यदि सावन के मंगलवार के दिन हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं तो कुछ ही समय में आपकी किस्मत बदल सकती है। ये खास उपाय आपकी हर मनोकामना पूरी कर सकते हैं।

Remedies for Saturn-शनि के लिए उपाय

1॰ शनिवार के दिन पीपल वृक्ष की जड़ पर तिल्ली के तेल का दीपक जलाएँ।

2॰ शनिवार के दिन लोहे, चमड़े, लकड़ी की वस्तुएँ एवं किसी भी प्रकार का तेल नहीं खरीदना चाहिए।

3॰ शनिवार के दिन बाल एवं दाढ़ी-मूँछ नही कटवाने चाहिए।

Remedies for Mercury-बुध के लिए उपाय

१॰ अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए।

२॰ बुधवार के दिन हरे रंग की चूड़ियाँ हिजड़े को दान करनी चाहिए।
 
३॰ हरी सब्जियाँ एवं हरा चारा गाय को खिलाना चाहिए।

Remedies for Moon-चन्द्रमा के लिए उपाय

१॰ व्यक्ति को देर रात्रि तक नहीं जागना चाहिए। रात्रि के समय घूमने-फिरने तथा यात्रा से बचना चाहिए।

२॰ रात्रि में ऐसे स्थान पर सोना चाहिए जहाँ पर चन्द्रमा की रोशनी आती हो।
 
३॰ ऐसे व्यक्ति के घर में दूषित जल का संग्रह नहीं होना चाहिए।

Remedies for Rahu-राहु के लिए उपाय

१॰ ऐसे व्यक्ति को अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए।

२॰ हाथी दाँत का लाकेट गले में धारण करना चाहिए।

३॰ अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए। सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है।

What is to be done on Friday-शुक्रवार को क्‍या करना चाहिए

१॰ काली चींटियों को चीनी खिलानी चाहिए।
 
२॰ शुक्रवार के दिन सफेद गाय को आटा खिलाना चाहिए।
 
३॰ किसी काने व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करना चाहिए।

Which colour is good for your Zodic Number?-कौन-सा रंग है आपके अंक के लिए शुभ?

जन्म के हिसाब से सभी लोगों के अंक अलग-अलग होते हैं। आपके अंक के अनुसार आपके लिए कौन-सा रंग शुभ है.

1) जो लोग 1, 10, 19 या 28 तारीख को पैदा हुए हैं उन लोगों का अंक 1 होता है। इस अंक के लोगों पर सूर्य का सबसे ज्यादा प्रभाव रहता है। इनके लिए ज्यादातर ओरेंज और पीला रंग पहनना बहुत शुभ रहता है। 

Solve the problems of life-जीवन की समस्‍यायों का समाधान

जीवन समस्याओं से भरा हो, तो...........यह उपाय करे अब्श्य कब होगा

1.
जन्मकुंडली में यदि ग्यारहवें घर में शनि हो, तो मुख्य द्वार की चौखट बनाने से पहले उसके नीचे चंदन दबा दें, सुख-समृद्धि से घर सुशोभित रहेगा।