पालथी मारकर आराम से बैठ जाएँ। रीढ़ की हड्डी बिलकुल सीधी होनी चाहिए। आँखे बंद, दो चार सांस लें और छोड़ें आराम से, सारा ध्यान साँसों पर, बिलकुल साधारण सांस लें और छोड़ें, अपना सारा ध्यान साँसों पर केन्द्रित करें। सांस बिलकुल ऐसे ही लें और छोड़े जैसे आम तोर पर लेतें हैं।